Tuesday, November 10, 2009

मैं भी चैपलिन


माँ क़िसी से फोन पर बात कर रही हैं.
किसी बात पर उधर से कहते हैं,
तेरे हाथ में है ही क्या ?
माँ कहती हैं,
हाँ! मेरे हाथ में है ही क्या ?
मैंने कहा,

अरे! आपके हाथ में फोन है,
और रेखायें भी.

8 comments:

  1. अरे वाह ! ये कविता है या चुटकला !

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  2. Mazedaar..apnee maa ko dikhaya nahee?

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  3. हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
    कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढ़े और अपनी बहुमूल्य
    टिप्पणियां करें

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  4. सच कहा सम्यक ! सब कुछ हमारे ही हाथ होता है, बस हमें हिम्मत रखनी चाहिये.

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  5. चैपलिन कहाँ मिल गये

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  6. चैपलिन बिना बोले कितना कहते थे और आपने थोडा लिखकर कितना लिखा.

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