
माँ क़िसी से फोन पर बात कर रही हैं.
किसी बात पर उधर से कहते हैं,
तेरे हाथ में है ही क्या ?
माँ कहती हैं,
हाँ! मेरे हाथ में है ही क्या ?
मैंने कहा,
किसी बात पर उधर से कहते हैं,
तेरे हाथ में है ही क्या ?
माँ कहती हैं,
हाँ! मेरे हाथ में है ही क्या ?
मैंने कहा,
अरे! आपके हाथ में फोन है,
और रेखायें भी.
और रेखायें भी.
अरे वाह ! ये कविता है या चुटकला !
ReplyDeleteMazedaar..apnee maa ko dikhaya nahee?
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हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
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Chote me jyada .Bahut khub.
ReplyDeleteसच कहा सम्यक ! सब कुछ हमारे ही हाथ होता है, बस हमें हिम्मत रखनी चाहिये.
ReplyDeleteचैपलिन कहाँ मिल गये
ReplyDeleteचैपलिन बिना बोले कितना कहते थे और आपने थोडा लिखकर कितना लिखा.
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